विश्व हिन्दी दिवस हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है। विदेशों में भारत के दूतावास इस दिन को विशेष रूप से मनाते हैं।१० जनवरी को संयुक्त राष्ट्र सभा में पहली बार हिंदी बोली गयी थी , तथा 1974 में देश की तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी ने नागपुर में प्रथम विश्व हिंदी दिवस का उद्घाटन किया था और २००६ में श्री मनमोहन सिंह ने जनवरी १० को इस दिन को मनाने का निर्णय लिया था। १९७४ के सम्मलेन काअंतर्राष्ट्रीय स्तर का था, जिसमें ३० देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे।सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिन्दी में कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। व्यावसायिक और प्रोफेशनल तौर पर हालाँकि अंग्रेजीका प्रचलन बढ़ा है , परन्तु साहित्य, गद्य,पद्य,फ़िल्में, पत्रकारिता,गीत एवं स्कूली शिक्षा में हिंदी का अभी भी प्रभाव है। इसको बढ़ावा देने के लिए हर प्रयास करने की ज़रुरत है जैसे युवाओं द्वारा हिंदी बोलना , संपर्क या संचार में हिंदी का प्रयोग करना , हिंदी में ब्लॉग या सोशल मीडिया पोस्ट करना , हिंदी नाटकों में भाग लेना , हिंदी फ़िल्में देखना या गीत गाना इत्यादि से हिंदी भाषा मेंनिश्चय ही परिवर्तन महसूस होता है।
विश्व भर के भारतीय दूतावास इस दिन कई तरह के कार्यक्रम एवं व्याख्यान आयोजित करके स्थानीय हिंदी प्रेमियों और भारतीय लोगों के बीच हिंदी भाषा का प्रचार करते हैं । दुनिया भर के कई विश्वविद्यालों में भारतीय दूतावास द्वारा चलाये जाने वाले हिंदी विभाग में बढ़ोतरी हुयी है।विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी चेयर की स्थापना करके विदेश मंत्रालय ने हिंदी शिक्षकों को भेजा जिससे अलग अलग देशों के हिंदी प्रेमी छात्रों को बेहद लाभ है रहा है।

कई प्रसिद्द कवियों ने हिंदी भाषा पर कृतियाँ लिख कर इस भाषा को अमर कर दिया है।भारतेन्दु हरिश्चंद्र की ये कविता सबसे ज़्यादा प्रखर और सटीक है

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